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वाराणसी में विकास के दावों की पोल खोलता अखरी-अवलेशपुर-भिखारीपुर मार्ग: 4 दिन की बारिश में सड़क बनी तालाब, गत्ता लदा ऑटो पलटा, लाखों की आबादी बेहाल, सरकारी तंत्र मौन!

बड़े अखबारों में छपने के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, देहाती लेखक लगातार उठा रहा है मुद्दा, लेकिन तानाशाह अफसरों के कान पर जूं तक नहीं
वाराणसी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्मार्ट सिटी के बड़े-बड़े दावों के बीच अखरी बाईपास से अवलेशपुर होते हुए भिखारीपुर तक जाने वाला मुख्य मार्ग आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। ये कोई गली-मोहल्ले की सड़क नहीं, बल्कि लाखों की आबादी के 24 घंटे आवागमन वाला मुख्य रास्ता है।
इस सड़क की दुर्दशा की खबरें दैनिक जागरण, अमर उजाला जैसे बड़े अखबारों में भी कई बार प्रमुखता से छपी हैं और देहाती लेखक डिजिटल मीडिया ने भी लगातार इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकारी तंत्र और विभाग के तानाशाह अधिकारियों को जनता के दर्द से कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा।
4 दिन की मूसलाधार बारिश ने ढाई कयामत, सड़क बनी मौत का कुआं
पिछले लगभग चार दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने इस सड़क की रही-सही कसर भी पूरी कर दी है। पूरी सड़क तालाब में तब्दील हो गई है। बड़े-बड़े गड्ढे पानी में छिप गए हैं, जिससे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

ताजा मामला आज का – गत्ता लदा ऑटो पलटा
आज का ताजा मामला इस बदहाली की सबसे बड़ी गवाही है। सड़क पर बने गड्ढों और फिसलन के कारण एक गत्ता लदा ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया।फोटो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे सड़क की खराब हालत के कारण ऑटो सड़क पर ही पसर गया। गनीमत रही कि कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, वरना प्रशासन सिर्फ कागजी खानापूर्ति करता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां रोजाना स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और कामगार इसी सड़क से गुजरते हैं। ऑटो, बाइक सवार रोज गिरते-पड़ते हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं।
लाखों की आबादी का सवाल, हजारों नहीं
ये रास्ता किसी एक गांव को नहीं जोड़ता। अवलेशपुर, भिखारीपुर, अखरी, चितईपुर और आसपास के दर्जनों गांवों के लाखों लोगों की लाइफलाइन है। चौबीस घंटे यहां से हजारों वाहनों का आवागमन होता है। ये सीधे NH और शहर को जोड़ता है। फिर भी इसकी अनदेखी क्यों?

देहाती लेखक का सवाल – आखिर कब जागेगा प्रशासन?
जब बड़े अखबार छाप चुके, जब देहाती लेखक जैसे लोकल मीडिया लगातार चिल्ला रहे हैं, जब जनता रोज हादसों का शिकार हो रही है, तो फिर PWD और नगर निगम के अधिकारी किस कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं?
क्या किसी बड़ी दुर्घटना, किसी की मौत का इंतजार किया जा रहा है तब जाकर सड़क बनेगी? या फिर इस सड़क का बजट भी सिर्फ कागजों में ही पास होकर अधिकारियों की जेब में चला गया?
वाराणसी को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए करोड़ों का बजट आता है, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि शहर की मुख्य सड़कों पर ही चलना दूभर है।
मांग: तत्काल मरम्मत हो, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो
स्थानीय जनता की मांग है कि इस मार्ग की तत्काल अस्थायी मरम्मत कर गड्ढों को भरा जाए और बारिश के बाद पूरी सड़क को नए सिरे से बनाया जाए। साथ ही उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो जो इतनी खबरें छपने के बाद भी आंख बंद किए बैठे हैं।
रिपोर्ट: मयंक कुमार कश्यप
देहाती लेखक डिजिटल मीडिया, वाराणासी
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- न्यूज़ एडिटर | देहाती लेखक
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