मिर्जापुर / वाराणसी। काशी से लगभग 80 किलोमीटर दूर विंध्य पर्वत पर स्थित माँ विंध्यवासिनी का दरबार 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि सुबह-सुबह ब्रह्म मुहूर्त में माता के दर्शन करने से मन को असीम शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पुजारी के अनुसार, जो भक्त सच्चे मन से प्रातःकाल माँ विंध्यवासिनी के दरबार में हाजिरी लगाता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और दिन भर के सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। नवरात्रि में यहां विशेष भीड़ होती है, लेकिन सामान्य दिनों में भी हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

काशी-प्रयागराज मार्ग पर स्थित इस पवित्र धाम को लेकर मान्यता है कि यहां माँ सती के पैर का अंगूठा गिरा था। इसलिए इसे सिद्ध पीठ भी कहा जाता है। सुबह की आरती के बाद माता का दिव्य श्रृंगार देखने मात्र से ही भक्त धन्य हो जाते हैं।
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