October 19, 2026
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देहाती लेखक एक्सक्लूसिव

गुरुजी नहीं, ‘ठग’ जी! देवरिया के एक कॉलेज में 30 साल से फर्जी वेतन का खेल, DIOS-विश्वविद्यालय की मिलीभगत से लुटा सरकारी खजाना

DIOS की मिलीभगत और सफेदपोशों की छत्रछाया में दबाई जा रही है थाना गौरी बाजार की FIR No. 502/2024

वाराणसी / देवरिया। प्राच्य विद्या के केंद्र कहे जाने वाले संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी का एक और काला कारनामा सामने आया है। देवरिया के श्री प्रकाश संस्कृत महाविद्यालय, बसन्तपुर सिरसिया में दशकों से फर्जी नियुक्ति और फर्जी अनुमोदन के सहारे सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये के वेतन लूट का सनसनीखेज खेल उजागर हुआ है।

थाने में FIR दर्ज, फिर भी वेतन जारी!
इस संगठित सिंडिकेट को लेकर थाना गौरी बाजार, देवरिया में मु.अ.सं. 502/2024 धारा 419, 420, 467, 468, 471 IPC के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। विवेचक उपनिरीक्षक दीपक पटेल ने दिनांक 25.02.2025 को विश्वविद्यालय के कुलसचिव को कड़ा अनुस्मारक भेजा है कि रिकॉर्ड उपलब्ध कराएं, लेकिन विश्वविद्यालय जानबूझकर फाइल दबाए बैठा है, जिससे विवेचना महीनों से लटकी है।

पुलिस ने पूछे 4 तीखे सवाल, विश्वविद्यालय बगलें झांक रहा है –
1. इस महाविद्यालय को मान्यता कब मिली?
2. इन शिक्षकों का अनुमोदन विश्वविद्यालय ने कभी किया ही है या नहीं?
3. किस सक्षम आदेश पर इनको सरकारी वेतन दिया जा रहा है?
4. मूल नियुक्ति पत्र और मान्यता प्रमाण पत्र कहाँ है?

जांच के घेरे में ये 5 नाम –
1. पौहारीशरण त्रिपाठी (बसन्तपुर, देवरिया) – कथित नियुक्ति 08.07.1960
2. गोपाल मिश्रा (गाजीपुर) – कथित नियुक्ति 27.07.1994
3. गणेशदत्त मिश्र (कुशीनगर) – कथित नियुक्ति 27.07.1994
4. करुणापति त्रिपाठी (बसन्तपुर) – कथित नियुक्ति 25.11.2003
5. सच्चिदानन्द त्रिपाठी (बसन्तपुर) – कथित नियुक्ति 14.02.2004

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रिकॉर्ड देने के बजाय ‘गुमशुदगी’ का ढोंग
जब पुलिस ने शिकंजा कसा तो कुलसचिव राकेश कुमार (IAS) ने जवाब देने के बजाय पत्रांक 3513/2025 दिनांक 06.08.2025 को एक हास्यास्पद ‘आवश्यक सूचना’ जारी कर दी कि – “यदि इन 5 शिक्षकों के बारे में किसी को जानकारी हो तो विश्वविद्यालय को बताएं।”

देहाती लेखक के 3 बड़े सवाल जो विभाग को घेर रहे हैं –

1. फाइलें गायब हैं या गायब कराई गईं? जिस अनुमोदन पर दशकों तक वेतन बंटा, उसकी फाइल विश्वविद्यालय के गोपनीय पटल से गायब कैसे?

2. नोटिस नौटंकी क्यों? पुलिस को साक्ष्य देने के बजाय आम जनता से जानकारी मांगना, क्या ये जांच को भटकाने का पैंतरा नहीं?

3. DIOS पर FIR क्यों नहीं? बिना सत्यापन के करोड़ों का वेतन बिल पास करने वाले DIOS कार्यालय के अफसर आज तक कैसे बचे हुए हैं?

देवरिया का ये मामला अकेला नहीं है, ये पूरे यूपी के एडेड संस्कृत कॉलेजों में चल रहे बड़े वेतन घोटाले के सिंडिकेट की तरफ इशारा करता है। अगर शासन ने उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई तो शिक्षा के मंदिर में ये महा-डकैती यूं ही चलती रहेगी।

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