May 23, 2026
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वाराणसी, 23 दिसंबर 2024

देहाती लेखक | वाराणसी निवेदिता शिक्षा सदन बालिका इंटर कॉलेज, तुलसीपुर, वाराणसी में ‘सत्या फाउण्डेशन’ द्वारा ध्वनि प्रदूषण जागरूकता कार्यक्रम के तहत क्रिसमस और नववर्ष पर पटाखे और डी.जे. के पूर्ण बहिष्कार हेतु संकल्प कार्यक्रम आयोजित किया गया। चेतन उपाध्याय द्वारा ज्ञानवर्धक चर्चा के बाद सभी विद्यार्थियों ने शपथपूर्वक प्रतिज्ञा ली कि क्रिसमस और नए साल पर पटाखे और डी.जे. का एकदम इस्तेमाल नहीं करेंगे। और साल के किसी भी दिन, किसी भी उत्सव को मनाने के लिए डेसीबल सीमा और समय सीमा का ध्यान रखेंगे और कभी भी कोई ऐसा कार्य नहीं करेंगे, जिससे आम जनता को कष्ट होता हो। छात्राओं को साइलेंस जोन के महत्व के बारे में बताया गया। वक्ता प्रणय कुमार सिंह ने कहा कि सत्या फाऊंडेशन प्रदेश की एक ख्यातिलब्ध संस्था है जो शोरगुल/ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित आयोजित कर आमजन और छात्र-छात्राओं को जागरुक कर रही है। संस्था के उद्देश्य और लक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए प्रणय कुमार सिंह ने कहा कि हमें अपने समारोह सुमधुर संगीत के साथ मनाने चाहिए। जो खुद को कर्णप्रिय लगे और पड़ोसियों को भी कर्णप्रिय लगे। श्री सिंह ने कहा कि ध्वनि विस्तारक यंत्रों के कर्कश आवाज और तेज शोर गुल करने वाले पटाखे मनुष्य के साथ ही वन्य जीव और पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है। उन्होंने कहा कि मानक से अधिक तीव्रता का शोरगुल मनुष्य को चिड़चिड़ा कर देता है। शांति की जगह मनुष्य तनाव में रहने लगता है। यह धीरे-धीरे मनुष्य को बीमार करती है और मनुष्य पागलपन और असामान्य व्यवहार का भी शिकार हो जाता है। निशा सिंह ने कहा कि दिन हो या रात शिक्षण संस्थान, कोर्ट, पूजा स्थल और अस्पताल के पास हॉर्न या लाउडस्पीकर बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। आवासीय इलाकों में दिन के दौरान आवाज को कम कराने और रात 10 से सुबह 6 के बीच ध्वनि को नियमानुसार, स्विच ऑफ कराने के लिए विद्यार्थियों को 112 नंबर की गुप्त शिकायत सेवा का सदुपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। विशाल ने ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ घर बैठे मुकदमा दर्ज कराने के लिए, उत्तर प्रदेश पुलिस के UPCOP नामक एप के बारे में भी विस्तार से समझाया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्या आनंद प्रभा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि पटाखे और डीजे के पूर्ण बहिष्कार की शपथ का हर विद्यार्थी को पालन करना है और आसपास के सभी लोगों को जागरूक करना है। आगे कहा कि धार्मिक कार्यक्रम की ध्वनि, कार्यक्रम स्थल तक सीमित रखनी चाहिए और आसपास के दूसरे लोगों के कानों में जबरदस्ती ध्वनि का प्रवेश कराना बिल्कुल ही गलत बात है। कार्यक्रम में विद्यालय की सभी छात्रायें, शिक्षक उपस्थित रही।

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Hemant/ ब्यूरो प्रमुख
Hemant/ ब्यूरो प्रमुख

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