September 10, 2026
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वाराणसी। क्या आप जानते हैं किसी भी मंदिर या धार्मिक स्थल के तालाब की मछली मारना सीधे ब्रह्महत्या के समान पाप माना गया है?

शास्त्रों में साफ लिखा है – देवताओं के तालाब, कुंड और पोखरे देव संपत्ति हैं। स्कंद पुराण के काशी खंड में कहा गया है कि काशी के पंचक्रोशी मार्ग पर पड़ने वाले सभी कुंड शिव के गण हैं और उनमें रहने वाले जीव शिव के ही सेवक हैं।

मऊ, बलिया और मुजफ्फरपुर के कई मंदिरों के तालाबों में आज भी लोग मछली को हाथ नहीं लगाते। मान्यता है कि वहाँ मछली मारने वाले के घर में बीमारी, संतान दोष, धन हानि और अकाल मृत्यु जैसे संकट आते हैं। पुजारियों के अनुसार यह संतों का दिया हुआ श्राप है जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। 9028

अब बात वाराणसी के पंचकोशी स्थित दुधिया तालाब की –

पंचकोशी परिक्रमा जो 3300 साल से भी ज्यादा पुरानी मानी जाती है, उसके दूसरे पड़ाव भीमचंडी के पास ही यह प्राचीन दुधिया तालाब स्थित है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि इस तालाब का पानी कभी दूध जैसा सफेद दिखता था। इसी दूधिया जल से कर्दमेश्वर महादेव का अभिषेक होता था, इसलिए इसका नाम दुधिया पड़ा।

काशी के 10 पौराणिक तालाबों में इसका नाम शामिल है, जिसे VDA ने 19 करोड़ की योजना में संवारने की लिस्ट में रखा था। इसमें दुधिया तालाब पर अलग से बजट तय हुआ था।

मान्यता है कि पंचकोशी यात्रा करने वाले लाखों कांवरिए इस तालाब में स्नान करके ही आगे बढ़ते हैं। तालाब की मछलियों को बाबा भोलेनाथ की सेना माना जाता है। इसीलिए यहाँ के स्थानीय लोग भी आज तक जाल नहीं डालते। वे मछलियों को आटे की गोलियां खिलाते हैं, मारते नहीं।

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शास्त्र के अनुसार धार्मिक तालाब की मछली मारने के 5 बड़े दोष –

1. देव-दोष: देव संपत्ति को नुकसान पहुंचाना।
2. जीव-हत्या दोष: अकारण जीव को मारना महापाप।
3. पितृ-दोष: तालाब के जल से पितरों का तर्पण होता है, उसे दूषित करने से पितर नाराज होते हैं।
4. दरिद्रता दोष: लक्ष्मी उस घर से चली जाती है।
5. संतान दोष: परिवार में रोग और अशुभ घटनाएं बढ़ती हैं।

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Team Dehati
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न्यूज़ एडिटर | देहाती लेखक

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