Varanasi news: डाफी और नुआव चौराहे के बीचो-बीच मेन हाइवे पर खुलेआम शराबखोरी, सो रही पुलिस
वाराणसी। पुलिस शहर को अपराध से मुक्त करने की तमाम योजनाएं तो बनाती है, लेकिन प्रमुख सड़कों व चौराहों के किनारे चल रहे ओपन बार को रोकने की कोशिश नहीं करती। वहीं अगर हम बात करें वाराणसी के डाफी और नुआव चौराहे के बीचो-बीच मेन हाईवे पर चल रहे शराब की दुकानों की तो शाम ढलते ही देशी-विदेशी शराब की दुकानों के सामने शराब के शौकीन बोतल खोलकर पैग बनाने लगते हैं।

देर रात तक यहां का माहौल ओपन बार जैसा बना रहता है। यहीं जमा होते हैं बलात्कार करने, चेन लूटने वाले अपराधी, जो नशा चढ़ने के बाद अपराध को अंजाम देने निकल पड़ते हैं। वहीं इसकी शिकायत कई बार आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त से की गई परंतु मामला सिर्फ आश्वासन की खूंटी पर टंग कर रहा गया।

इसकी सूचना कई बार वाराणसी अपर पुलिस आयुक्त के कार्यालय में भी की गई लेकिन अधिकारियों से चर्चा कर संयुक्त कार्रवाई करने का सिर्फ आश्वासन मिलता रहा। हो सकता है जेल सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने पर न्यायालय द्वारा लगाए गए अर्थ दंड का भुगतान न किए जाने पर जेल भी हो सकती है।

आबकारी एक्ट की धारा 36(क) के अनुसार सार्वजनिक स्थान पर शराब पीते पकड़े जाने पर आरोपी को पुलिस या आबकारी अधिकारी मौके पर ही जमानत पर रिहा कर सकते हैं। इसके बाद आरोपी को न्यायालय में निर्धारित तिथि को पेशी पर उपस्थित होना पड़ेगा। उसे अर्थ दंड की सजा दी जाएगी।

कभी-कभी होती है कार्रवाई: सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने से रोकने की कार्रवाई आबकारी विभाग कभी-कभी करता है। पुलिस भी अनदेखी करती है।

किसी ने नहीं रोका
विगत कुछ महीनों पहले डाफी और नुआव चौराहे के बीचो-बीच स्थित शराब दुकान के बाहर बाइक पर सवार दो युवक रुके और बीयर ली। दोनों सड़क किनारे खड़े होकर प्लास्टिक के ग्लास में बीयर निकालकर पीने लगे। लगभग 20 मिनट रुकने के बाद वे चले गए। इस दौरान न तो इन युवकों को शराब दुकानदार ने रोकने की कोशिश की और न किसी पुलिस जवान ने चेक किया। यह स्थिति यहां प्रतिदिन शाम सात से रात 10 बजे तक बनी रहती है।
पुलिस के जवान ने रोकने की कोशिश नहीं की
एक युवक सड़क पर खड़े होकर बीयर की बोतल मुंह में लगाए था। पुलिस का एक जवान कुछ दूरी पर खड़ा था, लेकिन उसने उसे रोकना व पकड़ना जरूरी नहीं समझा। शायद यही वजह है कि यहां लोग खुलेआम शराब पीते हैं।

क्या…? बीट इंचार्ज लेते हैं सुविधा शुल्क
सूत्रों की माने तो शहर के लगभग सभी अंडे के ठेलों पर शाम सात बजे के बाद अंडे के साथ शराब के पैग शुरू हो जाते हैं। इन ठेला चालकों से संबंधित थानों के बीट इंचार्ज मासिक या प्रतिदिन के हिसाब से अपना सुविधा शुल्क वसूलते हैं। इस शुल्क में कौन-कौन हिस्सेदार होता है, यह अफसर ही बता सकते हैं। इस कारण लोग ठेलों पर या इसके सामने खड़े होकर शराब पीने लगते हैं। रोज शाम होते ही ठेलों पर भीड़ उमड़ने लगती है, जो देर रात तक रहती है।
पुलिस ने कहा होगी कार्रवाई: इस संबंध में जब हमने वाराणसी अपर पुलिस आयुक्त वाराणसी कार्यालय पर इसकी सूचना दी तो पुलिस का कहना था कि डीसीपी काशी जोन में बात करिए| फिलहाल सवाल पूछने के बाद उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग के थाने पर इसकी सूचना दी जाएगी और कार्यवाही होगी।
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- न्यूज़ एडिटर | देहाती लेखक
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